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एक आम आदमी ..........जिसकी कोशिश है कि ...इंसान बना जाए

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मंगलवार, 31 मई 2011

अमां सुनती हो डीटीसी ......एक चिट्ठी




इन दिनों दिल्ली में डीटीसी नई वातानुकूलित बसों ने बलखा बलखा कर चलकर ब्लू लाईन की तो चलती ही बंद कर दी है । ये अलग बात है कि इन दिनों एसी लगातार बंद रखने के कारण , और शीशे पैक होने से लोगों को उसमें ब्लू लाईन की ही नहीं कई बार तो काले पानी की सजा सा फ़ील होने लगता है , लेकिन यहां तो इस चिट्ठी में मैंने डीटीसी को कुछ याद दिलाना चाहा है , देखता हूं कि मंत्री जी पढके क्या कहते करते हैं






और हां इस चिट्ठी को पढकर आप ये तो समझ ही गए होंगे कि , आपको अब कहीं भी किसी तरह की शिकायत होने पर वहां शिकायत पुस्तिका मांग कर उसपर अपनी शिकायत करने की पहल करनी होगी .। आधी लडाई तो यहीं जीत जाएंगे आप हम । चलिए मैं इस विषय पर अपने इस ब्लॉग पर आपसे कुछ कहता हूं ....फ़िलहाल इज़ाज़त 

बुधवार, 25 मई 2011

स्कूलों की दुकानदारी बंद करिए मंत्री जी ......एक चिट्ठी







आजकल स्कूल , ..स्कूल कम और दुकान ज्यादा लगते हैं । समझ ही नहीं आता कि आखिर इतने कायदे कानून होने के बावजूद भी ..ये दुकानदारी चल कैसे रही है ...कुछ ऐसा किया जा सकता है क्या , कि ये दुकानदारी बंद की जा सके ।

सोमवार, 23 मई 2011

कभी मुफ़्त सलाह भी दईदो ए उकील बाबू .......आज की पाती







वैसे तो मेरी ये चिट्ठी देश के तमाम अधिवक्ताओं , बार एसोसिएशनों और न्यायिक प्रशासन के नाम है , किंतु फ़िलहाल तो ये मैंने अपने यहां के दोस्तों को लिखी है , आप भी देखिए , आखिर आप भी तो दोस्त हैं न ..

बुधवार, 18 मई 2011

स्कूल को इंतज़ार है बस एक मास्साब का ...आज की चिट्ठी







उम्मीद करता हूं कि एक न एक दिन ये पत्र जरूर पढा जाएगा , और एक न एक दिन देश का हर नागरिक ऐसे पत्र से सरकार और प्रशासन को उसके कामों की याद दिलाता रहेगा । तब तक ये मुहिम चलती रहेगी ....चलती रहेगी ..

सोमवार, 16 मई 2011

आज की चिट्ठी



चिट्ठी को और बडा करके पढने के लिए आप उस पर चटका लगा कर बडा कर सकते हैं

शुक्रवार, 6 मई 2011

एक चिट्ठी ..........एक नया ब्लॉग


कल जब इस पोस्ट पर   मैंने लिखा था कि एक बार फ़िर से मैं एक आम आदमी की एक नई मुहिम शुरू करने जा रहा हूं , यानि एक चिट्ठी रोज़ , किसी न किसी मुद्दे पर , किसी न किसी समस्या पर , कोई सुझाव, सलाह ,शिकायत के रूप में सरकार और प्रशासन के लिए लिखी जाएगी तो मुझे बहुत सी प्रतिक्रियाएं मिलीं । मैं आश्वस्त हूं कि इन पर देर से ही सही मगर कार्यवाहियों की शुरूआत होती है । उसी पोस्ट पर आदरणीय समीर जी ने टिप्पणी दी कि

Udan Tashtari ने कहा…
अच्छा विचार है, जारी रखिये. एक नया ब्लॉग खोल कर उस पर रोज पत्र स्कैन करके भी लगाते रहे....बाद में अपडेट करने के काम भी आयेगा यदि कार्यवाही होती है या जबाब आता है. पत्र में उस ब्लॉग पते का जिक्र भी करें ताकि उन्हें पता रहे कि बात जग जाहिर है.
  तो उनकी सलाह मुझे रुच गई और इस नए ब्लॉग का जन्म हुआ ....नाम है एक चिट्ठी । यूं तो मैं नियमित रूप से इसमें अपनी लिखी चिट्ठियों को शामिल करता रहूंगा , किंतु आप सब भी सादर आमंत्रित हैं । पत्र की स्कैन प्रति मुझे प्रेषित कर सकते हैं ...तो आज की चिट्ठी ये रही