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मंगलवार, 31 मई 2011

अमां सुनती हो डीटीसी ......एक चिट्ठी




इन दिनों दिल्ली में डीटीसी नई वातानुकूलित बसों ने बलखा बलखा कर चलकर ब्लू लाईन की तो चलती ही बंद कर दी है । ये अलग बात है कि इन दिनों एसी लगातार बंद रखने के कारण , और शीशे पैक होने से लोगों को उसमें ब्लू लाईन की ही नहीं कई बार तो काले पानी की सजा सा फ़ील होने लगता है , लेकिन यहां तो इस चिट्ठी में मैंने डीटीसी को कुछ याद दिलाना चाहा है , देखता हूं कि मंत्री जी पढके क्या कहते करते हैं






और हां इस चिट्ठी को पढकर आप ये तो समझ ही गए होंगे कि , आपको अब कहीं भी किसी तरह की शिकायत होने पर वहां शिकायत पुस्तिका मांग कर उसपर अपनी शिकायत करने की पहल करनी होगी .। आधी लडाई तो यहीं जीत जाएंगे आप हम । चलिए मैं इस विषय पर अपने इस ब्लॉग पर आपसे कुछ कहता हूं ....फ़िलहाल इज़ाज़त 

6 टिप्‍पणियां:

  1. काश इन चिठ्ठियों से जून रेंगती इन नेतावों के कानो पर..
    फिर भी जारी रहिये भिया....

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  2. निरपेक्ष भाव से चिट्ठी लिखते रहना भी बड़ी तपस्या है। कभी इस का असर हो तो उसे भी बताइए।

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  3. जी हां सर , इन पत्रों से मिली प्रतिक्रिया भी अवश्य ही लगाऊंगा जल्दी ही ।

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  4. आपके द्वारा लिखे गए पत्र कहीं चिराग अली को तो भेंट किये जाते |
    मगर आपका प्रयास सराहनीय है | (चिराग अली पोस्ट ऑफिस के भाषा में जलाने से होता है )

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  5. हमें आजतक दो ही चीज़ों से प्यार हुआ है,बचपन में बीबीसी से और जवानी में डीटीसी से ! पहली वाली बंद होनेवाली है दूसरी वाली अंदर से बंद है...भाई,कुछ तो करो कोई !

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  6. aapki baat sahi mayne me hum sabko samjani hi chahiye ..ye hamara hak hai ki hum apne per hone wale anyay ke khilaf kum se kum apana munh to khole hi ...bahut hi badhiya prayash hai aapka

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आप मुझे इस मिशन के लिए रास्ता दिखाते रहिएगा .....मुझे इसकी जरूरत है