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एक आम आदमी ..........जिसकी कोशिश है कि ...इंसान बना जाए

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सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

मुख्यमंत्री - जरा बीमार का हाल तो पूछो


                         
                                                                                                     
                           
                             
आदरणीय मुख्यमंत्री जी ,
दिल्ली सरकार ,
दिल्ली ।

सादर अभिवादन ।   प्रदेश में प्रशासनिक परिवर्तन की पहल के प्रयास के लिए शुक्रिया और आभार । इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान राजधानी दिल्ली में कुकुरमुत्ते की तरह उगे हुए चिकित्सालयों , क्लीनिकों व अस्पतालों की ओर दिलाना चाहता हूं । आपकी ओर से सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए कई नए कदम उठाने की बात सुनी जा रही है ऐसे में मेरा एकमात्र निवेदन यह है कि सभी सरकारी अस्पतालों में इतनी दवाई और चिकित्सा सामग्री उपपब्ध होना सुनिश्चित कराया जाए कि लगभग हर अस्पताल के सामने खुला पडा दवा बाज़ार बुरी तरह चौपत हो जाने पर मजबूर हो जाए । 

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इनकी स्थिति में सुधार व परिवर्तन तो फ़िर भी योजनाबद्ध तरीके से किया जा सकता है किंतु लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड करते सिर्फ़ पैसा बनाने की बेतहाशा दौड में शामिल ये सभी निजि चिकित्सा संस्थान ,नर्सिंग होम ,अस्पताल  ही गैरजिम्मेदाराना और लापरवाही भरे तरीके के कारण  आज पूरे समाज में साक्षात मौत की दुकान से लगने लगे हैं । छोटे से क्लीनिक से लेकर बडे बडे आधुनिक अस्पतालों में जैसे बेतहाशा पैसा बटोरने की हवस और होड लगी हुई हो , कहीं भी वो चिकित्सकीय सेवा भावना का नामो निशान नहीं देखने को मिलता है । 
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हालांकि ऐसा नहीं है कि ये स्थिति शत प्रतिशत में है किंतु ये भी सच है कि अधिकांश में इन चिकित्सा संस्थानों को मुनाफ़े के लिए बनाई गई किसी कंपनी की भांति चलाया जा रहा है । लगभग हर अस्पताल में ईलाज करवाने के लिए पहुंचे मरीज़ और उसके तीमारदार पर एक अनचाहा बोझ और चिंता तो उस ईलाज़ का आर्थिक भार उठाने की मिल जाती है । इसके बावजूद अस्पतालों में फ़ैली अव्यवस्था , गलत ईलाज़ , मरीज़ों के साथ दुर्व्यवहार आदि पर शीघ्र ध्यान दिए जाने की जरूरत है । इन तमाम चिकित्सा संस्थानों को इनके लिए निर्धारित किए गए सारे मानकों के पालन की सुनिश्चितता तय करने के लिए यथाशीघ्र नियम कानून बनाने की योजना को भी अपने ऐजेडें में शामिल करने की कृपा करें  क्योंकि आम आदमी के  स्वास्थ्य की सुरक्षा ही देश का स्वस्थ भविष्य तय करेगा । उम्मीद है कि आप इस पत्र का संज्ञान लेंगे । 


धन्यवाद
                                                                                                     

गुरुवार, 21 जून 2012

मंत्री जी ....दलाली बंद करवाइए न



जैसा कि आप सब जानते हैं कि मेरी ये मुहिम एक आदमी की मुहिम है व्यवस्था को , प्रशासन को , मंत्रियों को अधिकारियों को जगाने की , उनका ध्यान आम आदमी की समस्या और मुश्किलों की ओर उनका ध्यान दिलाने की । मैं समय समय पर पत्र लिख कर इन्हें बताने की कोशिश करता हूं कि यहां ध्यान दिया जाना जरूरी है । पत्रों की स्कैन कॉपी भी यहां चस्पा कर दी जाती है ताकि भविष्य के लिए सनद रहे और जाने किस मित्र को ऐसे ही किसी प्रयास के लिए प्रेरित कर सके । आज की चिट्ठी , मुख्यमंत्री दिल्ली सरकार को इसलिए लिखी जा रही ताकि सरकारी दफ़्तरों के मुख्य द्वारों पर कब्जा जमाए और लोगों को ठगते बहलाते फ़ुसलाते दलालों के चंगुल से आम लोगों को मुक्ति दिलाई जा सके ।




सोमवार, 21 मई 2012

मंत्री जी ध्यान दें ......



जैसा कि आप सब जानते हैं , कि एक आम आदमी की लडाई के रूप में मैंने ये मुहिम शुरू की हुई है और इसके तहत मैं , सरकार , प्रशासन , मंत्रियों , विभागों , अधिकारियों , सबको अलग अलग मुद्दों , समस्याओं , सुझावों से संबंधित पत्र लिखता हूं और उन्हें प्रेषित करता हूं । उन पत्रों की स्कैन प्रति यहां दो उद्देश्यों के लिए चस्पा की जाती हैं । पहला तो ये कि सनद रहे कि एक पत्र यहां भी मौजूद है । दूसरा ये कि शायद ऐसी ही कोई चिट्ठी किसी मुझ जैसे आम आदमी को भी ऐसे किसी प्रयास के लिए प्रेरित कर सके क्योंकि एक से दो भले और दो से भले चार ....। आज मंत्री जी का ध्यान खींच रहा हूं , राजधानी दिल्ली में पेय जल के लिए प्याउ और प्रसाधन की घोर कमी की ओर ..हां यही है आज की चिट्ठी





शनिवार, 5 मई 2012

आज की चिट्ठी ......मंत्री जी ध्यान दें



जैसा कि आप जानते हैं कि , ये ब्लॉग उन चिट्ठियों का ई दस्तावेजीकरण है जिन्हें मैं समय समय पर सरकार , उनके प्रतिनिधि , विभिन्न संस्थानों , निकायों , अधिकारियों के नाम लिखता रहता हूं जो कि एक आम नागरिक के रूप में मेरा फ़र्ज़ है । स्थानीय समस्याओं से लेकर नागरिक जीवन के बहुत से मुद्दों पर सलाय और उपाय से लेकर कुछ भी और सब कुछ


आज की चिट्ठी , मुख्यमंत्री दिल्ली सरकार के नाम



मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

हाकिम झाडू उठाइए हो ....





जैसा कि आप जानते हैं कि पहले से ही सरकार के साथ अपनी चिट्ठी पत्री चलती रहती है अजी बात का क्या है ।  बस कभी आसपास की बातें तो कभी आमोखास की बातें, कुल मिलाकर बात ये है कि सरकार और हमारी दोस्ती धीरे धीरे पक्की होती जा रही है और हम उन्हें झंझोडने में लगे रहते हैं । हालांकि , पिछले दिनों खतों की रफ़्तार थोडी धीमी पडी ,लेकिन यकीन मानिए ,अभी कलम में स्याही बहुत है , बुलंदी बहुत है , तबाही बहुत है ...। किंतु पिछले कुछ दिनों में अपनी गली की एक समस्या को नासूर बनते हुए देख कर मन बागी हो उठा । हमने कार्यालय जाने से पहले दन्न से मोर्चा संभाला और सुपुत्र जी को स्कूल से वापस छोडते समय , फ़टाक से रपट तैयार कर दी । आसपास के लोगों से , संबंधित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों का पक्ष भी ले लिया गया । मोबाइल ने कैमरे का काम बहुत पहले ही बहुत आसान कर दिया , सो क्लिक , क्लिक ,क्लिक । मेल तैयार कर मीडिया मित्रों को प्रेषित कर दिया गया ।





















नई दुनिया एवं दैनिक जागरण ने न सिर्फ़ प्रमुखता से खबर छापी , बल्कि संबंधित जनप्रतिनिधियों से शिकायत के लिए किए जा रहे प्रयास की बाबत भी जानकारी मांग ली । अब इस खबर के प्रकाशित होने के बाद अस्थाई व्यवस्था / उपाय का कार्य शुरू हो चुका है , कैसा और क्या , ये बताता हूं अगली पोस्ट में ।