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एक आम आदमी ..........जिसकी कोशिश है कि ...इंसान बना जाए

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शनिवार, 1 सितंबर 2018

रात में हो कचरा संकलन और निस्तारण



जैसा कि  आप जानते हैं कि ,मैं समय समय पर सरकार प्रशासन व सम्बंधित अधिकारियों /विभागों को मुझ सहित आम जन को हो रही असुविधा और समस्याओं को लिखे जा रहे इन पत्रों में न सिर्फ उनकी ओर इंगित करता हूँ बल्कि अपने विचार/सुझाव भी उन तक प्रेषित करता हूँ | अक्सर इन पर संज्ञान लेकर कार्यवाही भी होती और मुझे पत्र पर प्रतिक्रिया भी मिलती है |आज ऐसी ही एक समस्या को लेकर यह पत्र प्रस्तुत है 



शनिवार, 24 सितंबर 2016

स्कूलों में फौजियों की नियुक्ति ...








आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय ,

सदर अभिवादन | इस पत्र के माध्यम से मैं , एक सुझाव आपके अवलोकनार्थ संज्ञान में लाना चाहता हूँ |


महोदय , देश भर के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय ,विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक व् माध्यमिक विद्यालयों में ,बच्चों की बुनियादी शिक्षा और  शारीरिक व् मानसिक विकास हेतु किये जा रहे प्रयासों में प्रतिबद्धता की घोर कमी दिखाई देती है | जबकि दूसरी तरफ सरकारें व् प्रशासन अपना श्रम , धन व् योजनाओं के व्यवय में कोइ कोर कसर नहीं रखती | 

महोदय, इस परिप्रेक्ष्य में एक सुझाव यह है कि हमारे पास अवकाश प्राप्त भूतपूर्व सैनिकों का एक बड़ा समूह इस कार्य के लिए सर्वथा उपयुक्त है यदि प्रत्यीक ग्रामीण विद्यालय में एक पूर्व सैनिक से स्कूल पर्यवेक्षक के रूप में श्रमदान का सहयोग लिया जा सकता है क्या ?? इससे न सिर्फ विद्यालय प्रशासन स्थिर हो सकेगासाथ ही फ़ौज का अनुशासन , राष्ट्र प्रेम , दृढ़ता , निडरता तथा आपसी सहभागिता जैसे नैसर्गिक व् चारित्रिक गुणों का भी विकास स्वाभाविक रूप से व उचित समय पर हो  सकेगा | स्वयं भूतपूर्व सैनकों के लिए ये चुनौती एक सुअवसर की तरह होगी |

अत; आपके अवलोकनार्थ यह पात्र प्रस्तुत है कृपया संज्ञान में लेने की कृपा करें |

                                                                 एक नागरिक 

बुधवार, 21 सितंबर 2016

बच्चे इस देश में खो गए





ये मुहिम  है  एक  आम नागरिक की , अपने स्तर पर अपने आस पास , अपने संज्ञान में जो भी जब भी जरूरी लगता है और बिना ये सोचे कि वो कितना प्रायोगिक है अथवा उसपर कभी कितनी कार्यवाही होगी अपने कर्तव्य रूप में पत्र के माध्यम से उन जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाने की कोशिश जरूर करता हूँ और यहाँ इसलिए रख लेता हूँ ताकि सनद रहे
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गुरुवार, 13 नवंबर 2014

एक पाती निगम पार्षद/ डिप्टी मेयर जी के नाम ............


जैसा कि आप सब जानते हैं कि इस ब्लॉग को मैंने अंतर्जालीय प्रमाण के रूप में बनाया है , जो गवाह है उन चिट्ठियों का जिन्हें किसी न किसी समस्या को लेकर , तमाम जनप्रतिनिधियों/अधिकारियों /मंत्रियों /सरकार को मैं समय समय पर लिखता रहा/रहता हूं ।


दूसरी खास बात ये है अब , मोबाइल कंप्यूटिंग के सहारे इस ब्लॉग पोस्ट को पूरी तरह से मोबाइल पर तैयार करके पोस्ट किया है । देखता हूं कि प्रयोग सफ़ल रहता है या नहीं । आज की चिट्ठी हमारे क्षेत्रे के निगम पार्षद जो संयोग से राजधानी दिल्ली के डिप्टी-मेयर भी हैं , उन्हें क्षेत्र में एक भी जनसुविधा के न होने के कारण हो रही कठिनाइयों की तरफ़ उनका व प्रशास  का ध्यान दिलाया गया है ...मुहिम जारी रहनी चाहिए/मुहिम जारी रहेगी ॥




तो आप भी उठाइए , पेन और अंतर्देशीय पत्र/लिफ़ाफ़ा/पोस्टकार्ड और बिंदास बेधडक लिखिए अपनी समस्याओं को , और हां ये मत कहिएगा कि कुछ नही होता , .............होता है जी बिल्कुल होता है ...इस ब्लॉग की  इस पोस्ट को देखें ॥

शुक्रिया ॥

सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

मुख्यमंत्री - जरा बीमार का हाल तो पूछो


                         
                                                                                                     
                           
                             
आदरणीय मुख्यमंत्री जी ,
दिल्ली सरकार ,
दिल्ली ।

सादर अभिवादन ।   प्रदेश में प्रशासनिक परिवर्तन की पहल के प्रयास के लिए शुक्रिया और आभार । इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान राजधानी दिल्ली में कुकुरमुत्ते की तरह उगे हुए चिकित्सालयों , क्लीनिकों व अस्पतालों की ओर दिलाना चाहता हूं । आपकी ओर से सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए कई नए कदम उठाने की बात सुनी जा रही है ऐसे में मेरा एकमात्र निवेदन यह है कि सभी सरकारी अस्पतालों में इतनी दवाई और चिकित्सा सामग्री उपपब्ध होना सुनिश्चित कराया जाए कि लगभग हर अस्पताल के सामने खुला पडा दवा बाज़ार बुरी तरह चौपत हो जाने पर मजबूर हो जाए । 

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इनकी स्थिति में सुधार व परिवर्तन तो फ़िर भी योजनाबद्ध तरीके से किया जा सकता है किंतु लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड करते सिर्फ़ पैसा बनाने की बेतहाशा दौड में शामिल ये सभी निजि चिकित्सा संस्थान ,नर्सिंग होम ,अस्पताल  ही गैरजिम्मेदाराना और लापरवाही भरे तरीके के कारण  आज पूरे समाज में साक्षात मौत की दुकान से लगने लगे हैं । छोटे से क्लीनिक से लेकर बडे बडे आधुनिक अस्पतालों में जैसे बेतहाशा पैसा बटोरने की हवस और होड लगी हुई हो , कहीं भी वो चिकित्सकीय सेवा भावना का नामो निशान नहीं देखने को मिलता है । 
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हालांकि ऐसा नहीं है कि ये स्थिति शत प्रतिशत में है किंतु ये भी सच है कि अधिकांश में इन चिकित्सा संस्थानों को मुनाफ़े के लिए बनाई गई किसी कंपनी की भांति चलाया जा रहा है । लगभग हर अस्पताल में ईलाज करवाने के लिए पहुंचे मरीज़ और उसके तीमारदार पर एक अनचाहा बोझ और चिंता तो उस ईलाज़ का आर्थिक भार उठाने की मिल जाती है । इसके बावजूद अस्पतालों में फ़ैली अव्यवस्था , गलत ईलाज़ , मरीज़ों के साथ दुर्व्यवहार आदि पर शीघ्र ध्यान दिए जाने की जरूरत है । इन तमाम चिकित्सा संस्थानों को इनके लिए निर्धारित किए गए सारे मानकों के पालन की सुनिश्चितता तय करने के लिए यथाशीघ्र नियम कानून बनाने की योजना को भी अपने ऐजेडें में शामिल करने की कृपा करें  क्योंकि आम आदमी के  स्वास्थ्य की सुरक्षा ही देश का स्वस्थ भविष्य तय करेगा । उम्मीद है कि आप इस पत्र का संज्ञान लेंगे । 


धन्यवाद
                                                                                                     

शनिवार, 5 मई 2012

आज की चिट्ठी ......मंत्री जी ध्यान दें



जैसा कि आप जानते हैं कि , ये ब्लॉग उन चिट्ठियों का ई दस्तावेजीकरण है जिन्हें मैं समय समय पर सरकार , उनके प्रतिनिधि , विभिन्न संस्थानों , निकायों , अधिकारियों के नाम लिखता रहता हूं जो कि एक आम नागरिक के रूप में मेरा फ़र्ज़ है । स्थानीय समस्याओं से लेकर नागरिक जीवन के बहुत से मुद्दों पर सलाय और उपाय से लेकर कुछ भी और सब कुछ


आज की चिट्ठी , मुख्यमंत्री दिल्ली सरकार के नाम



रविवार, 26 जून 2011

अस्पताल और दवाई के दुकान पडोसी होते हैं काहे ....आज की पाती




पहले आप इस कटिंग को पढिए । इसमें जिस हेडगेवार अस्पताल की खबर है उस अस्पताल की जो कि अभी हाल ही में पूर्वी दिल्ली के कडकडडूमा क्षेत्र में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में खोला गया है ,और इसकी एक दीवार , केंद्रीय स्वास्थय निदेशालय , दिल्ली सरकार का दफ़्तर है । यानि दिए तले ....आप पहले खबर पढिए 





इसके बाद हमने सोचा आजकल सरकार सुने हैं कि अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए आम लोगों से उपाय पूछ रही है तो हम भी क्यों न मंत्री जी के नाम एक आम आदमी की चिट्ठी भेज ही डालें , पढिए देखिए ठीक लिखा न ..





शुक्रवार, 24 जून 2011

सरकार को एक चिट्ठी पढने वाला चाहिए ...अरे कोई पढैय्या बाबू हैं हो ..




इस पोस्ट पर सरकार के नाम एक चिट्ठी लिखी गई थी । अति व्यस्त समय निकाल कर सरकार ने जवाब भी भेज दिया है , लेकिन थोडा सा किंतु परंतु हो गया है , क्या ? अरे आप खुद ही देखिए न ..पहले हमारी पाती बांचिए 






पढ लिए न , तो अब देखिए कि सरकार को क्या बुझाया ई पढके , लीजीए उनका जवाब पर भी गौर फ़रमाया जाए तनिक 



 यानि कुल मिला के मतलब ये कि सरकार को एक ऐसा आदमी भी चाहिए जो चिट्ठी को ठीक से पढ के बता समझा सके कि मंत्री जी ये चिट्ठी वर्षा जल को बचाने के उपायों पर काम करने के आग्रह के साथ भेजी गई थी आप तो नाली की सफ़ाई कराने में जुट गए । चलिए कोई बात नहीं कुछ तो कर ही रहे हैं । हम एक चिट्ठी नाली की सफ़ाई करवाने के लिए भेजते हैं आप उसमें वर्षा जल बचाने का निर्देश दें दें । हो गया हिसाब बराबर । 

सोमवार, 13 जून 2011

जरा धर लो इन बाबा जी को ..ए दरोगा जी ...आज की चिट्ठी










आदरणीय मुख्यमंत्री महोदया,



                     सादर नमस्कार । इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान राजधानी दिल्ली में पनपती एक खास  समस्या की ओर दिलाना चाहता हूं ।

राजधानी दिल्ली के विभिन्न आवासीय क्षेत्रों में तंत्र -मंत्र , झाड फ़ूंक , आदि के सहारे अंधविश्वास फ़ैला कर भोले-भाले निरक्षर लोगों को ठगने-लूटने वाले लोग तथा गिरोह बढते जा रहे हैं । आश्चर्य व दु:ख की बात ये है कि इनका ये सारा तामझाम और कारोबार कहीं भी ढका-छिपा नहीं है । बल्कि इसके लिए बाकायदा पत्र -पत्रिकाओं में इश्तहार और विज्ञापन तक देखर लोगों को फ़ंसाया जाता है ।


ये तमाम तंत्रमंत्र /काले जादू /झाड फ़ूंक के कार्यों में लिप्त लोग न सिर्फ़ लोगों को फ़ंसा कर उन्हें लूट व ठक लेते हैं बल्कि अक्सर ही हत्या/बलि/यौन शोषण तक जैसे गंभीर अपराधों में इनकी संलिप्तता होती है । अत: आपसे संबंधित अधिकारियों , विभागों एवं पुलिस अधिकारियों को इस बाबत निर्देश जारी किए जाएं । किसी भी समाज के लिए ये गंभीर व चिंताजनक बात है । उम्मीद है कि इस पर यथाशीघ्र ध्यान देंगी।
                                  

                                                                                             अजय कुमार झा 
                                                                                                        11/248, गीता कॉलोनी
                                                                                                          दिल्ली -110032                                                       
नोट :- इस पत्र की स्कैन कॉपी आम लोगों 
के सूचनार्थ http://ekchitthi.blogspot.com पर 
लगा दी गई है ।                                                 

शनिवार, 11 जून 2011

बिन काम , ना मिलेगा दाम , सुन ल्यो नेताजी ......आज की चिट्ठी





पिछले कुछ सालों से संसंद सत्र में करोडों रुपए की बर्बादी और राजनेताओं की हुल्लड हू देखते रहने के बाद मुझ जैसे आम आदमी की समझ में यही आया कि जब , हम गली में कूडा उठाने वाले  से लेकर दूध और अखबार  देने वाले तक को सिर्फ़ उसके काम के बदले ही पैसे देते हैं , तो फ़िर आखिर इन तमाम राजनेताओं को आखिर किस बात के लिए वेतन और भत्ता दिया जाए । इन्हें अब ये साबित करना होगा कि , इन्होंने इतना काम तो किया ही है कि उनको , हमारी ही कमाई काट के दिए गए टैक्स में से दी जाने वाली तनख्वाह दी जानी चाहिए ...तो इसलिए ये पाती लिख डाली हमने ...ठीक किया न ??

मंगलवार, 31 मई 2011

अमां सुनती हो डीटीसी ......एक चिट्ठी




इन दिनों दिल्ली में डीटीसी नई वातानुकूलित बसों ने बलखा बलखा कर चलकर ब्लू लाईन की तो चलती ही बंद कर दी है । ये अलग बात है कि इन दिनों एसी लगातार बंद रखने के कारण , और शीशे पैक होने से लोगों को उसमें ब्लू लाईन की ही नहीं कई बार तो काले पानी की सजा सा फ़ील होने लगता है , लेकिन यहां तो इस चिट्ठी में मैंने डीटीसी को कुछ याद दिलाना चाहा है , देखता हूं कि मंत्री जी पढके क्या कहते करते हैं






और हां इस चिट्ठी को पढकर आप ये तो समझ ही गए होंगे कि , आपको अब कहीं भी किसी तरह की शिकायत होने पर वहां शिकायत पुस्तिका मांग कर उसपर अपनी शिकायत करने की पहल करनी होगी .। आधी लडाई तो यहीं जीत जाएंगे आप हम । चलिए मैं इस विषय पर अपने इस ब्लॉग पर आपसे कुछ कहता हूं ....फ़िलहाल इज़ाज़त 

सोमवार, 23 मई 2011

कभी मुफ़्त सलाह भी दईदो ए उकील बाबू .......आज की पाती







वैसे तो मेरी ये चिट्ठी देश के तमाम अधिवक्ताओं , बार एसोसिएशनों और न्यायिक प्रशासन के नाम है , किंतु फ़िलहाल तो ये मैंने अपने यहां के दोस्तों को लिखी है , आप भी देखिए , आखिर आप भी तो दोस्त हैं न ..

बुधवार, 18 मई 2011

स्कूल को इंतज़ार है बस एक मास्साब का ...आज की चिट्ठी







उम्मीद करता हूं कि एक न एक दिन ये पत्र जरूर पढा जाएगा , और एक न एक दिन देश का हर नागरिक ऐसे पत्र से सरकार और प्रशासन को उसके कामों की याद दिलाता रहेगा । तब तक ये मुहिम चलती रहेगी ....चलती रहेगी ..

सोमवार, 16 मई 2011

आज की चिट्ठी



चिट्ठी को और बडा करके पढने के लिए आप उस पर चटका लगा कर बडा कर सकते हैं

शुक्रवार, 6 मई 2011

एक चिट्ठी ..........एक नया ब्लॉग


कल जब इस पोस्ट पर   मैंने लिखा था कि एक बार फ़िर से मैं एक आम आदमी की एक नई मुहिम शुरू करने जा रहा हूं , यानि एक चिट्ठी रोज़ , किसी न किसी मुद्दे पर , किसी न किसी समस्या पर , कोई सुझाव, सलाह ,शिकायत के रूप में सरकार और प्रशासन के लिए लिखी जाएगी तो मुझे बहुत सी प्रतिक्रियाएं मिलीं । मैं आश्वस्त हूं कि इन पर देर से ही सही मगर कार्यवाहियों की शुरूआत होती है । उसी पोस्ट पर आदरणीय समीर जी ने टिप्पणी दी कि

Udan Tashtari ने कहा…
अच्छा विचार है, जारी रखिये. एक नया ब्लॉग खोल कर उस पर रोज पत्र स्कैन करके भी लगाते रहे....बाद में अपडेट करने के काम भी आयेगा यदि कार्यवाही होती है या जबाब आता है. पत्र में उस ब्लॉग पते का जिक्र भी करें ताकि उन्हें पता रहे कि बात जग जाहिर है.
  तो उनकी सलाह मुझे रुच गई और इस नए ब्लॉग का जन्म हुआ ....नाम है एक चिट्ठी । यूं तो मैं नियमित रूप से इसमें अपनी लिखी चिट्ठियों को शामिल करता रहूंगा , किंतु आप सब भी सादर आमंत्रित हैं । पत्र की स्कैन प्रति मुझे प्रेषित कर सकते हैं ...तो आज की चिट्ठी ये रही